त्राटक साधना

त्राटक साधना
यह क्रिया ध्यान के अभ्यास से सम्बंधित है।  योग साधना की मुख्य क्रिया “ध्यान” है आसन नहीं।  आसान वह व्यवस्था है शरीर की जिसमे ध्यान लगाने में आसानी हो। इसके लिए त्राटक का अभ्यास करवाया जाता है।

प्रायोगिक विषय – एक हवादार किनती धुंधले प्रकाश वाले कमरे में कंबल दरी बिछाकर पद्मसन, सिद्धासन या सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं।  आपका यह आसन पूर्व की तरफ दीवार की और मुख करके होना चाहिए।  दिवार से उसकी दूरी दो मीटर होनी चाहिए।  दीवार पर १, ३, ३ का चकोर या गोलाकार दफ्ती का ऐसा बोर्ड लगाएं, जिस पर कला कागज चिपका हो। दफ्ती के चारो किनारो पर आधा इंच मोटाई के लकड़ी के फ्रेम जड़े हों। इस  बोर्ड के मध्य में छेद करें।   बोर्ड के पीछे गहरे भाग में बीच में छेद के पास एक टॉर्च का बल्ब इस प्रकार लगाएं की वह छेद से बाहर न निकले। बोर्ड को दीवार पर इस प्रकार से लगाएं की उसके बीच का छेद आपकी आँखों की सीध की ऊंचाई पे हो। बल्ब से पतला तार निकालकर आसन के समीप रखें। वहां बैटरी से उसका कनेक्शन हो और स्विच लगा हो।

आसन पर बैठकर स्विच  दबा दें। छेद की रौशनी बिंदु के सामान दिखेगी। इसमें प्रारम्भ में स्वसन क्रिया सामान्य ही रखें। सर्वप्रथम नाक की लौ को आँखों से देखें। आपकी ललाट के मध्य में दोनों भौहों के बीच के दबाव को बनाये रख कर बोर्ड के प्रकाशमान बिंदु को देखें। प्रारम्भ में बोर्ड का छेद बड़ा रहना चाहिए ( ५ मिमी व्यास का ) बाद में इसे छोटा करते जाएं और अंत में सुई के छेद तक अभ्यास करें।
त्राटक में यह अभ्यास करना चाहिए की हमारी दृष्टि की नहीं, हमारी पूर्ण चेतना उस बिंदु पर केंद्रित हो जाये। इसके अभ्यास में समय लगता है। . दस पंद्रह दिन के अंदर दृष्टि और चेतना केंद्रित होने लगती है।

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