मधु वशीकरण

मिटटी का एक कुल्हड़ लेकर उसमें मधु भरकर उसमें कपूर लौंग का महीन चूर्ण, कपूर और पान का रस डालें।  इसमें थोड़ी से वहां की मिटटी डालें जहाँ पर युवती रहती हो, जिसकी आप कामना कर रहे हैं। यदि आप किसी ऐसे फूल आदि के पौधे या किसी वृक्ष की कोई पतली जड़ भी प्राप्त कर सकें, जिसकी वह युवती सेवा करती है या उसके पास बैठती है, तो मिटटी की जगह उसे ही पीसकर उस मधु में डालें।  इसे खूब महीन करके पीसें।
भैरवी चक्र बनाकर देवी त्रिपुर मोहिनी की धुप – डीप से पूजा करें और इस कुल्ल्हड़ को वहां रखकर प्रतिदिन १०८ मंत्र का ध्यान लगाकर जाप करें।  मंत्र नीम प्रकार है :-
ॐ नमः दिवि त्रिपुरा…… वशम् वशम् कुरु कुरु स्वाहा।

इक्कीस दिन तक जाप करने के बाद इक्कीसवें दिन ही आक, गूलर, चिरचिरी, खैर और अनार की लकड़ी की समिधा जलाकर आग बनाकर आक की लकड़ी के चम्मच या पतले टुकड़े या आम के पत्ते से मधु के 108 मन्त्र पढ़कर १०८ बार हवन करें। हवन धीरे धीरे करें ताकि मधु धुआं देकर अच्छी तरह जल सके। लपट की अपेक्षा धुआं अधिक उपयुक्त होगा।

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